🌳 धन्यवाद का वृक्ष — The Tree of Gratitude
Moral: Gratitude • Responsibility • Respect for Nature
एक छोटे से शांत गाँव के बीचों-बीच
एक बहुत पुराना पीपल का वृक्ष खड़ा था।
उसकी जड़ों में वर्षों की गहराई थी,
शाखाओं में फैलाव…
और पत्तों में सरसराहट भरी दया।
वह पेड़ सबका था —
पर किसी का भी नहीं।
☀ गर्मियों में —
वह छाया देता।
🌧 बरसात में —
शरण देता।
❄ सर्दियों में —
उसके नीचे जलती आग लोगों को पास लाती।
बच्चे उसकी जड़ों पर बैठकर खेलते,
बुज़ुर्ग कहानियाँ सुनाते,
यात्री थकान उतारते।
धीरे-धीरे
पेड़ केवल पेड़ नहीं रहा —
वह गाँव का मौन रक्षक बन गया।
🪓 एक दिन… लालच जाग उठा
कुछ लोगों ने कहा —
“इतना बड़ा पेड़ है…
लकड़ी बेचेंगे तो बहुत पैसे मिलेंगे।”
कुल्हाड़ियाँ उठीं…
शाखाओं पर वार होने ही वाला था —
तभी गाँव के बुज़ुर्ग आगे आए।
उनकी आवाज़ भारी थी —
“रुको!”
सब स्तब्ध रह गए।
वह बोले —
“जब धूप ने हमें झुलसाया —
यही पेड़ हमारी ढाल बना।
जब आंधी आई —
इसीने हमें बचाया।
जब हम अकेले थे —
यहीं बैठकर हम एक-दूसरे के अपने बने।
क्या अब…
हम इसे सिर्फ पैसों के लिए काट देंगे?”
चुप्पी छा गई।
हवा तक स्थिर हो गई।
👦 तभी एक बच्चे ने कहा…
“दादाजी…
इस पेड़ ने कभी हमसे कुछ नहीं माँगा —
न पानी
न लकड़ी
न धन्यवाद…
उसने केवल दिया है।
अब हमारी बारी है
कि हम इसे बचाएँ।”
बच्चे की आवाज़ गूँज गई।
कुल्हाड़ियाँ नीचे गिर पड़ीं।
गाँव वालों ने हाथ जोड़ लिए।
उस दिन उन्होंने प्रण लिया —
“जो हमें जीवन देता है,
उसकी रक्षा करना — हमारा धर्म है।”
🧱 सेवा — सिर्फ शब्द नहीं, काम भी
लोगों ने पेड़ के लिए —
✔ मज़बूत चबूतरा बनवाया
✔ जड़ों की मिट्टी सँभाली
✔ वर्षा का पानी पहुँचाने की नाली बनाई
✔ बच्चों के बैठने की जगह बनाई
वहाँ एक पत्थर पर लिखा गया —
“कृतज्ञता… शब्द नहीं, व्यवहार है।”
🌿 ज्ञान — सिर्फ कहानी नहीं, समझ भी
गाँव के शिक्षक ने बच्चों से कहा —
“पेड़ सिर्फ लकड़ी नहीं होते…
वे हवा को शुद्ध करते हैं,
धरती को थामते हैं,
पक्षियों को घर देते हैं…
और इंसानों को
जीना सिखाते हैं।”
बच्चों ने कहा —
“हम पेड़ों को कभी नुकसान नहीं पहुँचाएँगे।”
🌼 समय बीता… लेकिन सीख नहीं
साल गुज़रे
नई पीढ़ी आई
गाँव बदला
पर वह पेड़ अब भी खड़ा था —
उतना ही विशाल
उतना ही शांत
उतना ही दयालु
उसकी छाया में बैठने वाला हर व्यक्ति
एक ही बात महसूस करता —
“जिसने हमें सहारा दिया…
हम भी उसका सहारा बनें।”
✨ अंतिम दृश्य
सूरज ढल रहा था।
बुज़ुर्ग ने बच्चों से कहा —
“याद रखना…
कृतज्ञता का मतलब
सिर्फ ‘धन्यवाद’ कहना नहीं है।
कृतज्ञता का मतलब है —
👉 जिसने हमें दिया — उसकी रक्षा करना
👉 प्रकृति के प्रति जिम्मेदार रहना
👉 जो अपार दया देता है — उसका सम्मान करना”
पेड़ के पत्ते हल्के से हिले —
मानो आशीर्वाद दे रहे हों।
🌟 Moral — Life Lessons
✔ जो देता है — उसका सम्मान करो
✔ प्रकृति हमारी नहीं — हमारी जिम्मेदारी है
✔ कृतज्ञता शब्द नहीं — चरित्र है
✔ पेड़ काटना आसान है…
पर उनका सहारा खोना दुखद है
✔ सच्ची इंसानियत है —
देना, बचाना और लौटाना
🪴 Closing Thought
“पेड़ को बचाना —
सिर्फ पर्यावरण नहीं…
भविष्य को बचाना है।”
Gratitude • Responsibility • Humanity

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